शुक्रवार, 25 जुलाई 2008

भगवान अमरनाथ की पवन वार्षिक परिक्रमा को श्राधलुओं हेतु सुगम बनाने के प्रयोजन से अमरनाथ साइन बोर्ड को अस्थायी तौर पर १०० एकड़ भूमि का आवंटन जिन हालात में रद्द किया गया, उससे एक गंभीर राष्ट्रघातक षडयंत्र की बू आ रही हे । इस सन्दर्भ में देश के शासकों, राजनितिक दलों और बुद्धिजीवियों की उपेक्षा स्थिति को अधिक चिंताजनक बना रही हे ।

१९वी शताब्दी के मध्य में जुम्मा मालिक द्वारा भगवान अमरनाथ की उपस्थिति की जानकारी मिलने के समय से ही परिक्रमा-यात्रा सतत जरी रही हे । यहाँ तक कि वर्ष १९९६ कि यात्रा के दौरान आए जबरदस्त बर्फानी तूफान में २०० श्रधालुओं के काल-कलवित जो जाने और वर्ष २००० में आतंकियों द्वारा ५० शिवभक्तों को मौत कि नींद सुलाने के बाद भी यह क्रम बाधित नहीं हुआ ।

अमरनाथ यात्रा में भक्तों कि बढती संख्या को देखते हुए यात्रियों को सुविधाएँ मुहेया कराने के प्रयोजन से राज्य विधानमंडल ने वर्ष २००० में एक अधिनियम पारित किया था, जिसके फलस्वरूप राज्यपाल कि अध्यक्षता में श्री अमरनाथ श्रइन बोर्ड का गठन हुआ । वर्ष २००३ कि वार्षिक परिक्रमा यात्रा के समय श्र इन बोर्ड के अध्यक्ष कि हेसियत से राज्यपाल लेफिटनेंट जनरल एस.के.सिन्हा ने राज्य सरकार से श्रधालु तीर्थयात्रियों को पूर्ण सुरक्षा देने का आग्रह किया । किंतु तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईदने उनका अनुरोध यह कह्सर अस्वीकार कर दिया कि चूँकि अब राज्य में शान्ति हे, अत: उसकी कोई आवश्यकता नहीं हे।

श्रधालु भक्तो की सुविधा के लिए श्र इन बोर्ड ने खुले शोचालयों और तंबुओं के स्थान पर अस्थायी बंद शोचालय और विश्राम स्थल बनाने कि योजना के लिए मुफ्ती सरकार से स्वीकृति मांगी । लेकिन मुख्यमंत्री सईद ने पर्यावरण दूषित होने का बहाना गढ़कर उसका खुला विरोध किया। [सा.अ.उ.][अंश्काल]

सभी ब्लोगर भाइयों को मेरा नमस्कार,

[यह मेंरा प्रथम संदेश हे ]
प्रिय पाठको'
" में कोई बहुत बड़ा लेखक नहीं हूँ संचार क्रांति की दुनिया में बस अपना नाम दर्ज कराने के लिए में इस माध्यम का उपयोग कर रहा हूँ । " समाचार पत्रों के माध्यम से जो जानकारी हासिल होती हे और जो जानकारी मुझे अच्छी लगती हे उस जानकारी के साथ टिप्पदी दे सकू ऐसी जानकारी पोस्ट करता रहूँगा ।

धन्यवाद/विनोद कुमार गुप्ता



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