रविवार, 30 नवंबर 2008
सोमवार, 17 नवंबर 2008
सोमवार, 13 अक्टूबर 2008
रविवार, 5 अक्टूबर 2008
शनिवार, 4 अक्टूबर 2008
गुरुवार, 18 सितंबर 2008
बुधवार, 17 सितंबर 2008
गुरुवार, 14 अगस्त 2008
(सा.अ.उ.अंश्काल)
किस्तावाद में देखते ही गोली मरने के आदेश, कई क्षेत्रों में कर्फु लागू
जम्मू/श्री नगर अमरनाथ भूमि हस्तांतरण विवाद को लेकर हिंसा और प्रद्रशानो का दौर जारी है । आन्दोलन के ४४वे दिन कश्मीर घाटी में कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई । घाटी में हिंसक प्रदर्शनकारियों से निबटने के लिए सुरक्षाबलों को दो जगह फायरिंग करनी पड़ी जिससे तीन लोगों की मौत हो गई । पुरे जम्मू-कश्मीर में इस्त्ती तनावपूर्ण है और कई जगहों पर कर्फ्यू जारी है। जम्मू क्षेत्र के किस्तावाद में सांप्रदायिक झड़पों के बाद इस्थिति गंभीर बनी हुई है और वहां देखते हे गोली मारने के आदेश दिए गए है।
घाटी में मंगलवार को गोली लगने से जख्मी हुए चार लोगों ने अस्पताल में इलाज सा दौरान बुधवार को दम तोड़ दिया।
बुधवार, 13 अगस्त 2008
रविवार, 10 अगस्त 2008
गुरुवार, 7 अगस्त 2008
साइनबोर्ड भूमि विवाद
आन्दोलन रोकने की केन्द्र की कोशिशों के बावजूद जम्मू में प्रदर्शन तेज
जम्मू/श्रीनगर अमरनाथ भूमि हस्तांतरण विवाद को सुलझाने के लिए दिल्ली में चल रही कोशिशों के बावजूद जम्मू क्षेत्र और घाटी में प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है । बुधवार को जम्मू शहर में घुसने को लिए बड़ी संख्या में आंदोलनकारी तवी नदी में घुस गए। जम्मू क्षेत्र में कई जगहों पर लोगों ने कर्फ्यू का उल्लंघन किया कठुआ में सुरक्षा बालों की फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई। घाटी में भी तागातर तीसरे दिन जनजीवन अस्त_व्यस्त रहा।
जम्मू और कठुआ में पुलिस के साथ झड़प में १८ लोग घायल हो गए। इस बीच अमरनाथ साइनबोर्ड के आठ सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया जिससे की जमींन हस्तांतरण के मुद्दे पर जारी हिंसा को देखते हुए बोर्ड सज पुनर्गठन हो सके । संशयों ने राज्यपाल एन.एन.वोहरा के उस संकेत के बाद इस्तीफा दिया है जिसमें उनहोंने कहा था की वह बोर्ड के अध्यक्ष पड़ से इस्तीफा देने के खिलाफ नहीं हैं । वहीं, अमरनाथ संघर्ष समिति ने कहा है की उसे साइनबोर्ड को १०० एकड़ जमींन के हस्तांतरण की रद करने वाले सरकारी आदेश को वापस लेने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। जम्मू_पठानकोट राजमार्ग पर कठुआ से दस किलोमीटर दूर प्रदर्शनकारियों ने सेना संरक्षण में कश्मीर जा रहे ट्रकों और सेना के वाहनों को रोक दिया। प्रदर्शनकारी सेना के वाहन पर पथराव करने लगे जिसके बाद जवानों की फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई। हुर्रियत कांफ्रेस के सयैद अली शाह गिलानी वाले गुट ने जमींन हस्तांतरण को वापस लेने के आदेश को संभावित संसोधन करने से केन्द्र को रोकने के लिए घटी में बंद का आह्वान किया है। इस बीच जम्मू पठानकोट सेक्शन पर फिर से रेल सेवा बहल हो गई है।
सभी दलों ने की शान्ति बहाली को अपील
नई दिल्ली अमरनाथ साइनबोर्ड भूमि हस्तांतरण विवाद को लेकर विरोध की आग में झुलस रहे जम्मू को शांत करने के लिए प्रधानमंत्री की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कोई सर्वमान्य हल तो नहीं निकल सका लेकिन बैठक के थोडी देर बाद ही संघर्ष समिति से बैचित के लिए चार सदस्यीय समिति बना दी गई । इस बीच, सभी राजनितिक पार्टियों ने शान्ति बहाली की अपील की।
गृहमंत्री शिवराज पाटिल के मुताबिक बातचीत की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जायेगी दूसरी तरफ, कांग्रेस के अन्दर उठ रही मांग के बावजूद सरकार ने राज्यपाल एन.एन.वोहरा को हटाने की मांग नामंजूर कर दी। इस्थिति का जायजा लेने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की मांग को भी केन्द्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है । प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सभी दल इस पर एक राय थे की अमरनाथ यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ मुहैया कराइ राये।
जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखने वाली पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस ने सुविधाओं की वकालत की। राजनितिक पार्टियों का कहना था की सांप्रदायिक सोहार्द के माहोल को बार्कर रखने के लिए जल्द से जल्द इस्थिति पर काबू पाया जाए। करीब चार घंटे चली सर्वदलीय बैठक में संसद में प्रतिनिधित्व करने वाली ३९ में से ३६ पार्टियों ने हिस्सा लिया ।
शनिवार, 2 अगस्त 2008
शुक्रवार, 25 जुलाई 2008
भगवान अमरनाथ की पवन वार्षिक परिक्रमा को श्राधलुओं हेतु सुगम बनाने के प्रयोजन से अमरनाथ साइन बोर्ड को अस्थायी तौर पर १०० एकड़ भूमि का आवंटन जिन हालात में रद्द किया गया, उससे एक गंभीर राष्ट्रघातक षडयंत्र की बू आ रही हे । इस सन्दर्भ में देश के शासकों, राजनितिक दलों और बुद्धिजीवियों की उपेक्षा स्थिति को अधिक चिंताजनक बना रही हे ।
१९वी शताब्दी के मध्य में जुम्मा मालिक द्वारा भगवान अमरनाथ की उपस्थिति की जानकारी मिलने के समय से ही परिक्रमा-यात्रा सतत जरी रही हे । यहाँ तक कि वर्ष १९९६ कि यात्रा के दौरान आए जबरदस्त बर्फानी तूफान में २०० श्रधालुओं के काल-कलवित जो जाने और वर्ष २००० में आतंकियों द्वारा ५० शिवभक्तों को मौत कि नींद सुलाने के बाद भी यह क्रम बाधित नहीं हुआ ।
अमरनाथ यात्रा में भक्तों कि बढती संख्या को देखते हुए यात्रियों को सुविधाएँ मुहेया कराने के प्रयोजन से राज्य विधानमंडल ने वर्ष २००० में एक अधिनियम पारित किया था, जिसके फलस्वरूप राज्यपाल कि अध्यक्षता में श्री अमरनाथ श्रइन बोर्ड का गठन हुआ । वर्ष २००३ कि वार्षिक परिक्रमा यात्रा के समय श्र इन बोर्ड के अध्यक्ष कि हेसियत से राज्यपाल लेफिटनेंट जनरल एस.के.सिन्हा ने राज्य सरकार से श्रधालु तीर्थयात्रियों को पूर्ण सुरक्षा देने का आग्रह किया । किंतु तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईदने उनका अनुरोध यह कह्सर अस्वीकार कर दिया कि चूँकि अब राज्य में शान्ति हे, अत: उसकी कोई आवश्यकता नहीं हे।
श्रधालु भक्तो की सुविधा के लिए श्र इन बोर्ड ने खुले शोचालयों और तंबुओं के स्थान पर अस्थायी बंद शोचालय और विश्राम स्थल बनाने कि योजना के लिए मुफ्ती सरकार से स्वीकृति मांगी । लेकिन मुख्यमंत्री सईद ने पर्यावरण दूषित होने का बहाना गढ़कर उसका खुला विरोध किया। [सा.अ.उ.][अंश्काल]
[यह मेंरा प्रथम संदेश हे ]
प्रिय पाठको'
" में कोई बहुत बड़ा लेखक नहीं हूँ संचार क्रांति की दुनिया में बस अपना नाम दर्ज कराने के लिए में इस माध्यम का उपयोग कर रहा हूँ । " समाचार पत्रों के माध्यम से जो जानकारी हासिल होती हे और जो जानकारी मुझे अच्छी लगती हे उस जानकारी के साथ टिप्पदी दे सकू ऐसी जानकारी पोस्ट करता रहूँगा ।
धन्यवाद/विनोद कुमार गुप्ता





















